एक सौदा रात का, एक कौड़ी चांद की चाहे तो चूम ले, तू ठोड़ी चांद की एक चांद की कश्ती में, चल पार उतरना है तू हल्के हल्के खेना, दरिया ना छलके तू नील समंदर है, मैं रेत का साहिल हूं आगोश में ले ले, मैं देर से प्यासी हूं गुलज़ार की कलम से गुलज़ार हुआ ... https://ift.tt/2wvQ0YP
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एक सौदा रात का, एक कौड़ी चांद की चाहे तो चूम ले, तू ठोड़ी चांद की एक चांद की कश्ती में, चल पार उतरना है तू हल्के हल्के खेना, दरिया ना छलके तू नील समंदर है, मैं रेत का साहिल हूं आगोश में ले ले, मैं देर से प्यासी हूं गुलज़ार की कलम से गुलज़ार हुआ ... https://ift.tt/2wvQ0YP
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